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हमारी पहचान
जनवादी पार्टी सोशलिस्ट एक ऐसी व्यवस्था के निर्माण के लिए प्रतिज्ञाबद्ध है, जहां निरपेक्ष धार्मिकता, उच्चतम संस्कार तथा न्यूनतम संघर्ष की नीति लागू हो। निरपेक्ष धार्मिकता का तात्पर्य व्यक्तिवाद, परिवारवाद, संकीर्णवाद, वर्णवाद तथा वर्गवाद की उपेक्षा कर नीति निर्धारित करना। उच्चतम संस्कार का तात्पर्य है, व्यक्तियों को ऐसे ढंग से संस्कारित किया जाये कि किसी का प्रतिकूल परिस्थिति में भी नैतिक पतन न हो । न्यूनतम संघर्ष का तात्पर्य है , ऐसी भौतिक व्यवस्था प्रदान की जाये, जहां अतिरिक्त जीवन संघर्ष की परिस्थिति न बन सके ।
‘‘तंत्रवाद’’ जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) का मूल दर्शन है। पूरी प्राकृतिक व्यवस्था मानव जीवन का हिस्सा है। मानवता की रक्षा के लिए जरूरी है कि व्यक्ति, समाज और सरकार प्रकृति की रक्षा के लिए प्रतिज्ञाबद्ध हो । यह प्रतिज्ञाबद्धता ही तंत्रवाद है।
निरपेक्ष धार्मिकता की नीति अपनाकर हमें स्वयं को उच्चतम संस्कार से संस्कारित करने के लिए प्रयासरत रहते हुए न्यूनतम संघर्ष की स्थिति पैदा कर, मानवीय व्यवस्था कीे स्थापना के लिए प्रयासरत रहना है।
तो आइए , ‘‘एक दुनिया- एक राश्ट्र ’’ के सर्वश्रेष्ठ चिंतन के साथ भारतवर्ष के सर्वांगीण विकास एवं व्यवस्था हेतु जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) के झंडे तले सच्चे जनवाद कीे स्थापना कर स्वर्णिम युग लाने के लिए कमर कस लें।[/vc_column_text][/vc_column][/vc_row]
- लोकतांत्रिक
- धर्मनिरपेक्ष
- समाजवाद
- समानता
- अखंडता
- प्रगति
- जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट ) : निजी प्रयास - सार्वजनिक हित
- हमारी नीति : निरपेक्ष धार्मिकता! उच्चतम् संस्कार!! न्यूनतम संघर्ष!!
- हमारा विजन : सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व - बेहतर नेतृत्व
- हमारा मिशन : व्यक्ति, समाज और व्यवस्था का लक्ष्य सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण निर्धारित कर स्वर्णिम युग की स्थापना।
- हमारा लक्ष्य : एक दुनिया - एक राष्ट्र
- जनवादी पार्टी ( सोशलिस्ट ) : सरल व्यवस्था - सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था
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जो अपने स्वार्थो के खिलाफ संघर्ष करते हैं,
लोग उसकी तरफ आशा भरी निगाह से देखते हैं।
अपने स्वार्थो के खिलाफ संघर्ष करने वाले जनवादियों को,
मेरा शत - शत नमन ।।
(डा0 संजय सिंह चौहान) राष्ट्रीय अध्यक्ष जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) -
देश के वंचितों, उपेछितों, शोषितों एवं अति पिछड़े, अति दलित वर्ग के लोगों :
अपनी आखों से देखो। अपने मुंह से बोलो।। अपने पैरों से चलो।।।
(डा0 संजय सिंह चौहान) राष्ट्रीय अध्यक्ष जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट)
जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) का निर्माण कम्युनिष्ट सिद्वान्त का निषेध नहीं बल्कि उसका विकास है क्योंकि जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) का चिंतन भौतिक विज्ञान (बाह्य विज्ञान) एवं आध्यात्मिक दर्शन (अन्तः विज्ञान) के बीच सामंजस्य पर आधारित होगा। जिससे समाज में आर्थिक समानता के साथ- साथ सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व का भी निर्माण हो सके, क्योंकि यह जरूरी है कि वर्तमान समय में व्यक्ति, समाज और व्यवस्था का केन्द्रीय विषय बदला जाये एवं भौतिक विकास के साथ -साथ आवाम के नैतिक उत्थान की परिस्थितियां पैदा की जायें, क्योंकि गरीबी है और इसका एक बहुत बड़ा कारण यह है कि गरीबी का बेहतर संस्कार नहीं है, जिससे वह खुद को तेजी के साथ उठा सके।
ऐसे में संघर्षो को दिशा देने के लिये एवं समाज में नैतिक मूल्यों पर आधारित समता, स्वतऩ्त्रता और न्याय स्थापित करने के लिये जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट ) का गठन अनिवार्य था। बहरहाल हमारा देश ही नहीं पूरा विश्व राजनैतिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। पूरे वैश्विक स्तर पर समाजवाद, साम्यवाद, लेनिनवाद, माओवाद, मनुवाद एवं धर्म निरपेक्षता तथा इन आदर्शों पर आधारित गठित राजनैतिक संगठनो एवं उनके संचालकों का संकीर्ण चिंतन, समाजिक असंतुलन को और वीभत्स रूप देता जा रहा है।
आजकल के दौर में एक ऐसी विचारधारा की जरूरत है जो समाज को जाति, धर्म, पंथ या वर्ग से उपर उठाकर मानवीय मूल्यों पर केन्द्रित संघर्ष की कल्याणकारी व्यवस्था दे सके, जिससे सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व का मालिक तथा समाज में आर्थिक रूप से समरसता लायी जा सके। इस जरूरत को भी पूरा करने के लिये जनवादी विचारधारा एवं इस पर आधारित एक राजनैतिक संगठन (जन राजनैतिक पार्टी) की अनिवार्यता काफी दिनों से महसूस की जा रही थी। इस कार्यभार को पूरा करने के लिये भी एक जनवादी पार्टी ( सोशलिस्ट ) का गठन ही बेहतर औजार साबित हो सकती थी। परिणामतः आधुनिक राजनैतिक परिदृश्य में सर्व हितकारी राजनैतिक विकल्प के रूप में जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) का गठन 23 अप्रैल 2004 को किया गया।




डॉ संजय सिंह चौहान जी का जन्म 08 अप्रैल 1975 को जनपद गाजीपुर के पोस्ट तुरना के बड़हरा गांव में हुआ था। स्वामी कन्हैया दास जमादार नालन्दा बिहार से प्रभावित होकर नेताजी 2004 के ऐतिहासिक जनवादी आंदोलन में कूद पड़े। जिसके कारण इनको कई बार जेल जाना पड़ा।