ताज़ा खबर: जन जनवादी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष हसीब खान ने उतरौला विधानसभा से टिकट मिलने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय सिंह चौहान से प्रदेश कार्यालय में भेंट की और माला पहनाकर उनका आशीर्वाद लिया। जन जनवादी पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री अशोक चौहान (प्रधान चौरी-चौरा गोरखपुर) जी कुशीनगर के विधानसभा खड्डा से जनवादी-समाजवादी सुभासपा के गठबंधन प्रत्याशी घोषित । जनवादी पार्टी सोशलिस्ट कार्यकारिणी की बैठक 3 दिसम्बर को लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित की जाएगी जनवादी साथियों, 25 नवंबर को लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में शानदार तरीके से संपन्न हुई जनवादी पार्टी सोशलिस्ट की जनवादी जनक्रांति महारैली को सफल बनाने के लिए सभी का हृदय से आभार, संजय सिंह चौहान, राष्ट्रीय अध्यक्ष, जनवादी पार्टी सोशलिस्ट जनवादी पार्टी सोशलिस्ट के तत्वाधान में भाजपा हटाओ प्रदेश बचाओ जनवादी जनक्रांति महारैली 25 नवंबर को रमाबाई अंबेडकर मैदान में 11 बजे सुबह से शुरू होगी। आप लोगों से निवेदन हैं कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंच कर रैली को सफल बनायें। जनवादी पार्टी सोशलिस्ट के कार्यकर्ता आज़मगढ़ में माननीय अखिलेश यादव जी और डॉ संजय सिंह चौहान जी का स्वागत करते हुए।

हमारे बारे में

यह मान्यता लम्बे अर्से से चली आ रही थी कि राश्ट्र निर्माण की परियोजनाओं के विकसित होने के साथ साथ जनता को उनके संवैधानिक अधिकारों का अवदान भी मिलता रहेगा तथा देष के आर्थिक चक्र ;म्बवदवउपब बमतबसमद्ध में समग्र समाज समाहित होगा। परिणामतः गरीबी, बेरोजगारी और मानवीय दुर्दषा के सभी कारणों का उन्मूलन हो जायेगा । विकास की भौतिक दं्रदात्मकता जैसे – जैसे गति पकड़ेगी और उत्पादक षक्तियों का जैसे – जैसे विकास होगा वैसे -वैसे जाति, समुदाय, सम्प्रदाय, र्धािर्मक और विभिन्न सामन्ती अवषेशांे की संकीर्ण संरचनायें ध्वस्त हो जायेगी तथा समाज में सौहार्द्रपूर्ण एवं समरसता का वातावरण पैदा होगा। किन्तु आज यह अनुमान गलत साबित हो चुका है क्योंकि किसी देष, राज्य या लोकतंत्र की प्रगति का पैमाना यही हो सकता है कि भौतिक विकास एवं आर्थिक समृद्धि का फल किस हद तक आम लोगों तक पहुंचा । यह ऊपर लिखित विवरणों से स्पश्ट हो जाता है ।

यह सही है कि समाज के वंचित और निर्धन तबकों तक समृद्धि का प्रवाह धीरे – धीरे होता है, लेकिन इसका भी एक पैमाना होना चाहिए किन्तु हमारे देष में यह पैमाना कहीं नजर नहीं आता। दूसरी तरफ व्यवस्था और उस पर हानि वर्ग के द्वारा भी मिले आष्वासनों पर कभी गरीब, षोशितों, उपेक्षितों और पीड़ित जनता ने यकीन किया था किन्तु आज उन वादों की तरफ मुड़ कर एक नजर डालने पर हम देखते हैं कि कुछ वर्ग विषेश के निहित स्वार्थी तत्वों ने पूरी विकास प्रणाली ;क्मअमसवचमउमदज ेलेजमउद्ध को अपने ही वर्ग विषेश को विकसित करने की दिषा में मोड़ कर विकास के दायरे को संकुचित कर दिया है। जिस प्रणाली के समक्ष आज समूचा षोशित एवं उपेक्षित वर्ग हैरतअंगेज ढंग से बेबस पड़ा है। लम्बे अर्से तक धीरज एवं सहनषीलता दिखाने के बाद इन लोगों का यकीन डगमगाने लगा है और आज इस नतीजे पर पहुंचता जा रहा है कि अब षायद हमें अपना ख्याल खुद ही रखने के लिये तैयार हो जाना चाहिये, जिससे षोशण, दमन, भुखमरी और तिरस्कार विहीन समाज की तरह बढने वाले कार्यभार की र्पूिर्त की जा सकती है। परिणामतः इनके संघर्शों को दिषा देने के लिये एवं समाज में नैतिक मूल्यांे पर आधारित समता, स्वतऩ्त्रता और न्याय स्थापित करने के लिये जनवादी पार्टी (सोषलिस्ट) का गठन अनिवार्य था।

बहरहाल हमारा देष ही नहीं पूरा विष्व राजनैतिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। पूरे वैष्विक स्तर पर समाजवाद, साम्यवाद, लेनिनवाद, माओवाद, मनुवाद एवं धर्म निरपेक्षता तथा इन दर्षनांे पर आधारित गठित राजनैतिक संगठनांे एवं उनके संचालकों का संकीर्ण चिंतन, समाजिक असंतुलन को और वीभत्स रूप देता जा रहा है। ऐसे दौर में एक ऐसी विचारधारा की जरूरत थी जो समाज को जाति, धर्म, पंथ या वर्ग से उपर उठाकर मानवीय मूल्यों पर केन्द्रित संघर्श की कल्याणकारी व्यवस्था दे, जिससे सर्वश्रेश्ठ व्यक्तित्व का मालिक तथा समाज में आर्थिक रूप से समरसता लायी जा सके। इस जरूरत को भी पूरा करने के लिये जनवादी विचारधारा एवं इस पर आधारित एक राजनैतिक संगठन (जन राजनैतिक पार्टी) की अनिवार्यता काफी दिनों से महसूस की जा रही थी। इस कार्यभार को पूरा करने के लिये भी एक जनवादी पार्टी (सोषलिस्ट) का गठन ही बेहतर औजार साबित हो सकती थी। परिणामतः आधुनिक राजनैतिक परिदृष्य में सर्व हितकारी राजनैतिक विकल्प के रूप में जनवादी पार्टी (सोषलिस्ट) का गठन 23 अप्रैल 2004 को किया गया ।